Kavi Sammelan🙂 (Old Memories …)
ये सुर मैं बो नहीं पाता, न धुन काबिल गयी होती,
तरन्नुम और तराने की ये प्यासें, सील गयी होती।
जमाने को झुमाते हैं, मेरे दर्दों के ये किस्से,
ये शायर मंच ना पाता, अगर तुम मिल गयी होती!!
….✍अमित कु0 आज़ाद
Kavi Sammelan🙂 (Old Memories …)
ये सुर मैं बो नहीं पाता, न धुन काबिल गयी होती,
तरन्नुम और तराने की ये प्यासें, सील गयी होती।
जमाने को झुमाते हैं, मेरे दर्दों के ये किस्से,
ये शायर मंच ना पाता, अगर तुम मिल गयी होती!!
….✍अमित कु0 आज़ाद