ये हक़ीक़त नहीं, कोई क़ाबिल न हम,
हाँ तेरे ख्वाहिशों के, मुक़ाबिल न हम !
एक धब्बे ने ढक ली पूरी चाँदनीं,
तब से सोया नहीं है, मेरा दिल न हम !….✍🏻आज़ाद
ये हक़ीक़त नहीं, कोई क़ाबिल न हम,
हाँ तेरे ख्वाहिशों के, मुक़ाबिल न हम !
एक धब्बे ने ढक ली पूरी चाँदनीं,
तब से सोया नहीं है, मेरा दिल न हम !….✍🏻आज़ाद