यूँ मंचों से तुझको, बुलाते हीं क्युँ हम?
निगाहों में तेरेे, समाते हीं क्युँ हम?
तेरी आरज़ू थी, तभी हम पधारे
फ़रिश्ते हैं, धरती पर आते हीं क्युँ हम ?.. ✍🏻अमित कु0 आज़ाद
यूँ मंचों से तुझको, बुलाते हीं क्युँ हम?
निगाहों में तेरेे, समाते हीं क्युँ हम?
तेरी आरज़ू थी, तभी हम पधारे
फ़रिश्ते हैं, धरती पर आते हीं क्युँ हम ?.. ✍🏻अमित कु0 आज़ाद